इतिहास (History)के पन्नों में दुर्रू शेहवार (Durru Shehvar) का नाम उनकी समाज सेवा(Social Work)और परोपकारों के लिए दर्ज है. क्योंकि हैदराबाद (Hyderabad) की जनता की भलाई के लिए उन्होंने कई काम किए. दुर्रू शेहवार जितनी अपनी परोपकारी कामों के लिए जानी जाती हैं. उनके साथ एक और भी कहानी जुड़ी जो उन्हें किसी राजकुमारी (Princess)या निजाम (Nizam) की बहुओं से अलग करती है. दुर्रू शेहवार का हैदराबाद के निजाम की बहू बनने की कहानी काफी रोचक है. जब दुर्रू शेहवार की शादी (Marriage) के लायक हुईं तो उनके पास कई शाही मुस्लिम परिवारों (Royal Muslim Family) से शादी का प्रस्ताव आया. इसमें मिस्र के राजा (King of Egypt) और फारस (Faras) के शाह भी थे. इसके अलावा हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान (Mir-Usman-Ali-Khan) ने भी अपने बड़े बेटे राजकुमार आजम शाह (Azam Shah) के लिए शादी का प्रस्ताव भेजा. चूंकि बुरे वक्त में हैदराबाद के निजाम ने उनकी बड़ी मदद की थी. इसलिए वो इस प्रस्ताव को ठुकरा ना सके.
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